HAAL - E - DIL

by Shahrukh Ahmad

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इस किताब में जितनी भी नज़्में हैं सब अलग-अलग वक़्त पर और अलग-अलग मिज़ाज़ में लिखी गयीं हैं |


जिंदगी हमेशा किसी न किसी दौर से गुज़र रही होती है और ना चाहते हुए भी हमारी सोच पर उस दौर का असर होता है |


बस, इसी वजह से इस किताब की नज़्में कभी खुशहाल तो कभी बेहद ग़मजदा हैं |


आख़िर जिंदगी भी तो ऐसी ही चलती हैं |

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